Saturday, 19 September 2015

इंसाफ़ !

जिस दिन आकाश बेदाग होगा
चेहरा चाँद का साफ होगा

गर्दन पर है क़र्ज़ लहू का
गर्दन देकर ही माफ़ होगा

                                  ------ गुलज़ार  (आरुषि तलवार के लिए)